tag:blogger.com,1999:blog-239078852008-05-17T19:42:46.968+05:30मेरा राजस्थान My RajasthanYugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comBlogger28125tag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-23835363551240473472007-07-09T20:02:00.000+05:302007-07-09T20:04:00.788+05:30मै फिर आगया हूँकाफी दिनो बाद नेट पर बैठने का मौका मिला,<br />नारद याद आगया।काफी कुछ बदल गया है।<br />अब मैं नियमित आया करुंगा।<br />युगल मेहरा<div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1149596382304745322006-06-06T17:49:00.000+05:302006-06-06T17:49:47.303+05:30इसे खून पीना कहते हैमेरे महान देश की सरकार ने फिर से पेट्रोल डीजल के दाम बढा दिये। पूरे चार रूपये।<br> जिसने भी सुना भोचक्का रह गया।<br> मेरे एक मित्र का मानना है कि सरकार सडकों पर वाहनो का दबाव कम करने का प्रयास कर रही है।<br> सरकार का राग हमेशा की तरह वही पुराना है कि कच्चे तेल के दाम बढ रहै हैं। इसलिये सरकार घाटा नहीं खा सकती है और दाम बडाना मजबूरी बताती है। और फिर मेरे देश की तेल कम्पनीयां भी तो कह रही है की वे घाटे में चल रही है।<br> <span style="font-weight: bold;">सच्चाई कोई नहीं जानता</span><br> आखिर क्या है सच्चाई, जब दुसरे मुल्कों में पेट्रोल के दाम कम है तो हमारे देश में उच्चतम स्तर पर क्यों?<br> इसका सिर्फ और सिर्फ एक ही कारण है कि हमारे देश की सरकारें संवेदनहीन है। दाम बढाने का जनता पर क्या असर पडता है इससे सरकार को कोई लेना देना नहीं है। लेकिन एक बात सोचने लायक है कि सरकारें जनता कमर क्यों तोड रही है?<br> सारा देश जानता है कि पेट्रोल डीजल के दाम बडने से कहां क्या असर होता है और कहां कितनी महंगाई बड जाती है?<br> आखिर सरकार की संवेदनहीनता का क्या कारण है जबकी इन लोगों को वोट मांगने हमारे बीच में ही आना पडता है?<br> जब भी दाम बढाए जाते हैं उसका कारण कच्चे तेल की कीमत में वृद्धी तथा सरकार को हो रहा घाटे को बता दिया जाता है, मैं ये जानना चाहता हूं कि आखिर सरकार को घाटा किस जगह पर हो रहा है। जिस मुल्य में तेल सरकार को पडता है उसी मुल्य में हमें तो नहीं बेचा जाता है बल्की बढाकर बेचा जाता है फिर सरकार को घाटा लगने का तो कोई सवाल ही नहीं खडा होता है।<br> <span style="font-weight: bold;">सारा खेल रेवेन्यु का है</span><br> आखिर सारा खेल रेवेन्यु का है। एक लीटर पेट्रोल पर सरकार कर लगाकर द्वारा 17 से 19 रूपये तक बचाती है। जब ईंधन की कीमते एफोर्ड करना देश की जनता की जैब के दायरे से बाहर होता जा रहा है तो क्या सरकार&nbsp; का इस वस्तु से रेवेन्यु कमाना कहां तक वाजिब है? कुछ कर केन्द्र सरकार लगाती है कुछ कर राज्य सरकार लगाती है।<br> आखिर ईंधन को रेवेन्यु के दायरे से बाहर क्यों नहीं कर दिया जाता?<br> मंत्री जी का क्या जाता है।<br> वे तो सरकारी खर्च के ईंधन पर यात्राएं करते हैं।<br> <span style="font-weight: bold;">कम्पनीयों का झूठ</span><br> देश की कम्पनीयां हमेशा अपने आप को घाटे में बताती रहती है, मेरे समझ में ये नहीं आता की अगर ये कम्पनीयां इतनी घाटे में रहती है तो फिर डीलर को डिस्काउंट कहां से देती है?<br> क्या पेट्रोल कर दायरे से मुक्त हो पाएगा? शायद कभी नहीं।<br> सरकारों को ऐसे ही निरीह जनता का लहू पीना है और पीती रहैंगी। चाहै कोई सी भी सरकार आए खुं पीना बदस्तुर जारी रहैगा।<div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1149322627911047272006-06-03T13:47:00.000+05:302006-06-04T03:55:50.936+05:30क्या आत्मा अजर अमर है?<p>आत्मा अजर अमर होती है। शरीर नाशवान है वह मरता है परन्तु आत्मा कभी नहीं मरती है। यही हमें बचपन से ही सिखाया जाता है।<br />आत्माएं शरीर बदलती रहती है। आत्माओं के लिये शरीर मात्र एक किराए के मकान की तरह होता है। जब वे इसे छोडती हैं तो शरीर </p><p>को मृत मान लिया जाता है।<br />इसका मतलब हम आत्माए हैं जो इस शरीर में रह रहै है। किसी दिन हम इस शरीर को छोड देंगे।<br />लेकिन जब सभी जानते हैं कि आत्माएं नहीं मरती तो फिर किसी के मरने पर इतना रोना धोना क्यों होता है।<br />दुनिया की जनसंख्या क्यों बढ रही है?<br />यह बात भी आश्यर्य की है कि दुनिया की जनसंख्या क्यों बढ रही है जबकी आत्मा तो अजर अमर है। आत्माएं शरीर बदलती है इससे </p><p>मानव का जीवन मृत्यु का खेल चलता है, तो इस नियम के अनुसार तो जनसंख्या नहीं बढनी चाहीये न। क्योंकी जो मर रहा है वो </p><p>कुछ दिनों बाद फिर जन्म ले रहा है, तो फिर इतनी पापूलेशन कैसे बढी।<br />हम भारतीय 35 करोड से एक अरब कैसे होगये?<br />क्या नई नई आत्माएं जन्म ले रही है?<br />उदाहरण के तोर पर भारत देश में 1940 के समय लगभग 35करोड की जनसंख्या थी। इसका मतलब 35करोड आत्माएं 35करोड </p><p>शरीरों में रह रही थी। तो फिर ये जनसंख्या उत्तरोत्तर आगे कैसे बडती गई। तो क्या लगातार आत्माएं भी जन्म ले रही थी?<br />ये बात मेरी समझ से परे है<br />क्या आत्माएं भी आपस में शादी करके बच्चे पैदा कर रही है?<br />तभी तो एक अरब आत्माएं हो गई है।<br />इसका मतलब सरकार को आबादी नियंत्रण के ये जनता को समझाने कि बजाय आत्माएं को समझाना चाहिये कि वो आत्माएं पैदा न </p><p>करें। बैचारे शरीर फालतु ही बदनाम हो रहै हैं जनसंख्या वृद्धी के लिये।<br /></p><div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1147937614326496002006-05-18T13:03:00.000+05:302006-05-18T13:03:34.386+05:30ऐसा भी होता हैकभी कभी एसा होता है कि मन करता है कि चिठ्ठे पर कुछ लिखा जाए और कुछ सूझता नहीं, ऐसा मेरे साथ ही नहीं सबके साथ होता होगा। हम सभी के साथ कभी न कभी ऐसा वक्त आता है जब हम लिखना चाहते हैं और यह तक नहीं सोच पाते कि विषय क्या होना चाहिये। और जब विषय ही नहीं हो तो लिखें क्या खाक। विषय ढूढंने के लिये समाचार पत्र देखतें हैं या टीवी। फिर भी विषय तलाशने में असफल होते हैं। ऐसे में क्या करे चिठ्ठाकार। <br>क्या लिखे वो?<br>आज मेरे साथ यही समस्या हुई। लिखने की इच्छा हुई और विषय नहीं ढूंढ पाया कि किस पर लिखा जाए।<br>तब मुझे एक आईडीया आया।<br>मैने सोचा कि जब कुछ नहीं आरहा तो क्यो न दुसरों के चिठ्ठे पढूं।<br>और जब चिठ्ठे पढे तो सोचा कि क्यों न इसी विषय पर लिख दुं कि विषय नहीं मिल रहा है। <br>और ठोक दी यह पोस्ट।<br>अब किसी को इसे पढकर मजा आये न आये, मुझे तो लिखने में बहूत मजा आया।<br>झेलो भई झेलो<br>हा हा हा<div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1147720798287744052006-05-16T00:49:00.000+05:302006-05-16T00:49:58.370+05:30आरक्षण किसी का हक नहीं है<p><font size="2">चलो आप यह बात तो स्वीकार करते हैं कि दलितों का सामाजिक स्तर ऊंचा नहीं हुआ है।<br>अब मैं आपके प्रश्नों के जवाब देता हूँ।<br>मेरी पिछली पोस्ट में मेरे चिठ्ठाकार भाईयों ने कमेंट्स किये।<br>उनमें से <a href="http://ashish.net.in/khalipili"> <font color="#000000">आशीष जी</font></a> ने कुछ प्रश्न किये, कुछ <a href="http://www.blogger.com/profile/2459428"><font color="#000000">प्रतीक</font></a> ने <a href="http://www.blogger.com/profile/20377158"><font color="#000000"> छाया भाई</font> </a>ने आरक्षण का विरोध किया तथा <a href="http://www.blogger.com/profile/17971410"><font color="#000000">सृजन शिल्पी</font></a> ने समर्थन किया। अब मैं आरक्षण विरोधियों के तर्कों के उत्तर देने के प्रयास करूंगा। </font></p> <p><font size="2">&quot;&quot;&quot;१.माना दलितो को आरक्षण नौकरी के लिये चाहिये, अब उन्हे पदोन्नति के लिये आरक्षण क्यों चाहिये ?&quot;&quot;&quot;<br>आशीष जी आरक्षण दलितों का सामाजिक स्तर सुधारने के लिये किया गया प्रयास है। पदोन्नति के लिये आरक्षण भी इसी कार्य का एक हिस्सा है। जिससे कि उंचे पदों पर भी पिछडी जातियों के लोग आयें ओर उनका प्रतिनिधित्व करे। </font></p> <p><font size="2">&quot;&quot;&quot;२.दलितो को शिक्षा के लिये आरक्षण दे दिया, पढ लिख गये, अब उच्च शिक्षा के लिये आरक्षण क्यो चाहिये ?&quot;&quot;&quot;<br>आरक्षण का प्रमुख उद्देश्य दलितों को शिक्षित करना है अब इसमें आप ये कहैं कि दलित को तो सिर्फ साक्षर करदो, तो फिर बाकी पढाई की भी क्या जरुरत है। दलित अपने स्तर पर किये प्रयासों द्वारा उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाता है क्योंकि अकसर दलित गरीब होता है। </font></p> <p><font size="2">&quot;&quot;&quot;३.पिता ने आरक्षण के द्वारा नौकरी पा ली, अब बच्चे को आरक्षण क्यों चाहिये ?<br>इसका जवाब बहुत आसान है। - पूत्र जिन्दगी भर पिता पर बोझ नहीं बन सकता, उसको भी घर को चलाना ही पडेगा। पिता के जमाने के कॉम्पीटीशन में ओर अभी के में कितना अन्तर है ये सभी जानते हैं। प्रतियोगिताओं में आरक्षित वर्गों कि मेरिट उंची होना प्रमाण है कि कॉम्पीटीशन बढ गया है। इसलिये बच्चे को आरक्षण की आवश्यकता है। हमारे देश में पिता का राशन कार्ड में नाम होने के बावजूद पुत्र व्यस्क होने पर अपना राशन कार्ड अलग बनाता है क्योंकि उसका संघर्ष उसका अपना होता है। </font></p> <p><font size="2">&quot;&quot;&quot;५.आप अपने आसपास मे आरक्षण द्वारा लाभित ऐसे व्यक्ति का नाम बता दिजिये जिसने अपनी जाति के उद्धार के लिये काम लिया हो ?<br>ऐसे हजारों लाखों लोग है जो अपनी जाति के उद्धार के लिये प्रयासरत हैं। जिनके नाम कोई नहीं जानता जिनके प्रयास कोई नहीं जान पा रहा। <br>कितने ही ऐसे भारतीय हैं जिन्होने स्वतंत्रता के आंदोलन में सक्रीय भुमिका निभाई पर क्या हम सबके नाम जानते हैं। हां पर मैं अवश्य ऐसे कई व्यक्तियों और संस्थाओं को जानता हूं जो अपनी जाति के उद्धार के लिये कार्य कर रहैं है। </font></p> <p><font size="2">&quot;&quot;&quot;६.किसी भी छात्रावास मे जाइये और किसी से भी पूछिये कि सरकार द्वारा दी जाने वाली स्कालरशीप के पैसो का ये छात्र क्या उपयोग करते है ?<br>मेरा आधा जीवन छात्रावास में गुजर गया। मैं जानता हूं कि किस प्रकार छात्र अपनी स्कालरशिप का उपयोग करता है। कुछ लोगो के गलत उपयोग को देखकर सभी को गाली नहीं दी जा सकती। लडके अपनी किताबें ओर साल भर के एक जोडी कपडे स्कालरशिप से खरीदते हैं। दलितों की स्थिती देखने के लिये उनमे रहना आवश्यक है। </font></p> <p><font size="2">&quot;&quot;&quot;७. आपके अनुसार मौजुदा आरक्षण व्यवस्था ने ५७ साल मे कुछ नही किया (जातिवाद/छुवा छुत बरकरार है), लेकिन क्यो ? क्या यह वर्तमान व्यवस्था की असफलता नही है ?<br>ये आपने सबसे अहम सबाल किया आशीष जी तथा ये प्रश्न मैने कई लोगों के मुह से सुना और पढा है। <br>इसके जवाब में मैं यह कहना चाहता हूं कि इतने सालों में आरक्षण व्यवस्था कुछ तो किया है। हां ज्यादा असर नहीं हुआ तथा (जातिवाद/छुवा छुत बरकरार है) लेकिन यह व्यवस्था कि असफलता नहीं है। व्यवस्था अपना कार्य कर रहीं है परन्तु इसकी गती धीमी है। <br>यदी कोई दवा किसी रोग को अत्यंत धीमे ठीक कर रही है और उसका असर नजर नहीं आरहा तो दवा बन्द नहीं की जाती बल्की उसकी मात्रा में ईजाफा कर दिया जाता है, रोगी को मरने के लिये नहीं छोड दिया जाता। एक और उदाहरण लो हमारा कोई कार्य सरकारी दफ्तरों में लालफीताशाही के कारण यदी धीमी गती से होता है या फिर होता ही नहीं है तो क्या हम प्रयास बन्द कर देते हैं। नहीं ना। तो फिर आरक्षण भी धीरे धीरे असर कर रहा है। </font></p> <div><font size="2">और प्रतीक भाई मैं आपसे भी कहना चाहता हूँ कि वर्गों के मध्य संघर्ष तो सदियों से इस देश में चलता आरहा है, आरथक्षण से वह नहीं बडेगा। आरक्षण से दलितों की सामाजिक हैसियत मे सुधार आएगा। हां अन्य वर्ग उनकी ईज्जत करेंगें इसका मैं नहीं कह सकता। हां इतना कह सकता हूं कि जब तक इज्जत नहीं होगी आरक्षण मिलता रहेगा। <br>हो सकता है आने वाले 25 वर्षों में सभी वर्ग समान हो जाए तो तब इस आरक्षण कि जरूरत नहीं पडे। सृजन शिल्पी ने मेरे पोस्ट पर लिखा है कि यदि सामाजिक व्यवस्था के कर्णधारों ने संविधान के प्रावधानों को लागू करने में ईमानदारी और सदाशयता दिखाई होती तो शायद वैसे हालात काफी पहले ही पैदा हो सकते थे, और आरक्षण समाप्त हो सकता था। <br>आरक्षण योग्यता को नहीं खा रहा हैं बल्कि छुपे हुए योग्यता का विकास कर रहा है।<br>सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरक्षण किसी का हक नहीं है बल्कि यह तो प्रयास है पिछडों को उबारने का।</font></div> <div><font color="#ff0000" size="4"><a href="http://srijanshilpi.blogspot.com/2006/04/blog-post_14.html">इस बारे में सृजन शिल्पी की ये पोस्ट ज्ञानवर्धक है। तथा सबको पढनी चाहिये।</a></font></div> <p><font size="2">&nbsp;</font></p><div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1147256962726782282006-05-10T15:59:00.000+05:302006-05-10T15:59:22.803+05:30क्या वाकई में भारत में आरक्षण का प्रयोजन सिद्ध हो गया है?<DIV><FONT face=Arial><FONT size=2>Wednesday, May 03, 2006 को मैनें मेरे चिठ्ठे </FONT><A href="http://qtoday.blogspot.com/"><FONT color=#000000 size=2>आज का सवाल</FONT></A><FONT size=2> पर एक प्रश्न किया था कि <A href="http://qtoday.blogspot.com/2006/05/blog-post_03.html"><FONT color=#000000>क्या भारत में आरक्षण का प्रयोजन सिद्ध होगया है?</FONT></A></FONT></FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>और मुझे <FONT face="Times New Roman" color=#808080><A href="mailto:ramu_ag@yahoo.com">ramu_ag@yahoo.com</A><FONT face=Arial color=#000000>&nbsp;द्वारा जवाब मिला था कि</FONT></FONT></FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>"""<FONT face="Times New Roman" size=3><EM>अ.जा./अ.ज.जा. के कुछ व्यक्ति वर्तमान उच्च पदों पर हैं, कुछ अत्यन्त धनवान हैं, कुछ करोड़पति अरबपति हैं, फिर भी वे और उनके बच्चे आरक्षण सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं, ऐसे सम्पन्न लोगों के लिए आरक्षण सुविधाएँ कहाँ तक न्यायोचित है? कब तक चलेगा ऐसा</EM>?"""</FONT><BR>इसके बाद मैने कई चिठ्ठे पढे जो आरक्षण का विरोध कर रहै हैं। देश में आरक्षण का नाग फुंफकार रहा है, नेता जी ने आग को हवा दे है।&nbsp;जितना मैं पढ सका उतना पढने के बाद मेरे मन में ये प्रश्न आता है कि लोग आरक्षण का विरोध कर रहे हैं या कि आरक्षित लोगों का। अभी दिल्ली में मेडिकल के छात्रों ने जुते साफ किये, झाडू लगाया।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>मेरा कहना है कि जुते साफ करने वालों तथा झाडू लगाने वालों को अपमानित करना कहां तक न्यायोचित है?</FONT></DIV> <DIV><FONT size=2><A href="mailto:ramu_ag@yahoo.com">ramu_ag@yahoo.com</A><FONT face=Arial>&nbsp;का कहना है कि आरक्षण का प्रयोजन सिद्ध हो चुका है।</FONT></FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>मैं सभी से पूछना चाहता हूं कि क्या वाकई में क्या वाकई में SC, ST, OBC में आने वाली जातियों का सामाजिक स्तर उठ गया है। क्या वाकई में इन लोगों को समाज में इज्जत की नजर से देखा जाता है?</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>आज सुबह जब मैं घर के बाहर आया तो मैने देखा कि हरिजन झाडू लगा रही थी और साथ में कचरा ट्राली लेकर चल रही थी मेरे पडोस की सभी महिलाएं ज्यादातर ब्राह्मण, जैन, राजपूत, वैश्य इत्यादी दो फीट दूर से ट्रोली में कचरा फैंक रहीं थी। थोडी देर बाद जब वो रोटी लेने आयी तो सारी महिलाएं उस हरिजन महिला के टोकरे में दूर से ही रोटीयां फैंक रही थी। वो महिलाएं उस हरिजन महिला के छूना नहीं चाहती थी। इसलिये दूर से ही रोटियां फैंक रहीं थी।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>और ये घटना पूरे देश में रोज सवेरे घटती है।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>तो फिर कहां से लोगों को लगता है कि इन लोगों का सामाजिक स्तर बढ गया है।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>लोग उसके छूने से डर रहै हैं कि कहीं अपवित्र न हो जाए, क्योंकि वो मल मूत्र साफ करके आयी है।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>मैं आपको एक द्श्य दिखाता हूं।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>सोचिये कि एक ऐसा ब्राह्मण जो छूआछूत करता हो घायलावस्था में हाई-वे पर पडा है तथा दूर दूर तक कोई नजर नहीं आरहा और थोडी देर बाद एक ओर से कंधे पर झाडू उठाए एक हरिजन आरहा है वह घायल को देखते ही उसे बचाने कि सोचता है तथा घायल को कंधे पर उठाकर ले जाता है तो क्या वो घायल ब्राह्मण हरिजन से मना करेगा कि मुझे मत छू, पहले नहाकर आ?</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>आज भी देश के कई हिस्सों में रोज दलितों का अपमान होता है।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>तो फिर कहां से इनका सामाजिक स्तर बढ गया है?</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>आज भी राजस्थान में कई जगह दलित दुल्हों को घोडी से उतार दिया जाता है।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>क्या दलित हिन्दु नहीं है, क्या उन्हे घोडी पर बैठने का हक नहीं है ?</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>एसे ही कई कारण है जिस वजह से सरकार ने आरक्षण का प्रावधान कर इनका सामाजिक आर्थिक स्तर&nbsp;उठाने का कदम उठाया था।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>राजस्थान की आज की खबर ही लो (<A href="http://www.bhaskar.com/newsitems/view_city_news.php?id=5437"><FONT color=#000000>सोजन्य से दैनिक भास्कर</FONT></A>)</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>अल्लाह बख्श, जालोर, 9 मई। तिलोडा के राजकीय विध्यालय में&nbsp;मेघवाल&nbsp;समाज के पांच बच्चे पढ रहै हैं, जिनको विधालय के अध्यापक और प्रधानाध्यापक प्रताडित करते हैं, तथा जातिसूचक गालियां देते हैं। जब बच्चों ने ये बाते घर पर बताई तो&nbsp; बच्चों के दादा अध्यापकों से मिले तो अध्यापकों ने उनके साथ भी गाली गलोज की।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>दादा फिर कलेक्टर से मिले।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>तथा अब जांच बैठा दी गई है।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>पता नहीं क्या होगा इस जांच का?</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>इस देश के हर शहर गांव में कभी न कभी इस तरह की घटनाएं होती रहती है तो फिर कहां से आरक्षण का प्रयोजन सिद्ध हो गया है।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>लोग कहते हैं कि आरक्षण का आधार आर्थिक होना चाहिये जिससे कि वाकई में गरीबी दूर होगी(मेरा भी यही मानना है)।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>लेकिन मैं ये कहता हूं कि ये कोन तय करेगा कि फलाना व्यक्ति गरीब है। जाहिर है कि ये कार्य सरकारी तंत्र द्वारा किया जाएगा तो क्या विश्वास किया जाए कि सरकारी लोग सही कार्य करेंगे।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>पूरे देश में BPL सूचियां बनाई गयी लेकिन इसमें कई अमीरो ने भी अपने नाम जुडा लिये हैं।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>सब ये जानते हैं कि फलानी जाती वाकई में निम्न जीवन व्यतीत कर रहीं हैं। तो इसीलिये आरक्षण का आधार जातिगत रखा गया क्योंकि आज भी इस देश में कुछ लोगों को निम्न जाति का कह कर हैय द्ष्टी से दैखा जाता है।</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>आखिर में</FONT></DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2>मेरा मानना यह है आरक्षण का प्रयोजन सिद्ध नहीं हुआ है।</FONT></DIV><div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1147082742652350012006-05-08T15:35:00.000+05:302006-05-08T15:35:42.713+05:30खतरनाक बुढ्ढा Part Two (बुढ्ढों से सावधान) Harmful Oldman<DIV><STRONG><A href="http://myrajasthan.blogspot.com/2006/05/harmful-oldman.html"><FONT color=#000000>गतांक से आगे</FONT></A></STRONG></DIV> <DIV>आखिरकार हम अपनी हंसी को दबा नहीं पाये और सारे जोर जोर से हंसने लगे। बुढ्ढा भी अचकचाता हुआ नींद से जागने का नाटक करते हुए उठा।</DIV> <DIV>उसने हमारी तरफ देखा, हम उसकी तरफ देखकर हंस रहै थे। तभी उसने आगे वाली सीट पर देखा तो पाया कि आगे तो लडका बैठा है। बेचारा बडा शर्मिंदा हुआ।</DIV> <DIV>कोटा पहुंचने पर मैं लडकी के पास गया ओर मैने कहा कि क्या ये बुढउ तुम्हे परेशान कर रहा था तो उसने हामी में सर हिला दिया।</DIV> <DIV>मैने उससे कहा कि जब हम कह रहै थे कि कोई परेशान कर रहा है तो फिर क्यों जवाब नहीं दिया। तो वो कुछ नहीं बोली। मैने उससे कहा कि "तुमने कुत्तों से सावधान" सुना होगा, अब नया सुनो <STRONG>बुढ्ढों से सावधान।</STRONG></DIV> <DIV>लडकी से मैने कहा कि यदी यही छेडखानी कोई लडका कर रहा होता तो तुम अभी तक उसके जूते पडवा देती फिर तुमने उसे क्यों बख्शा। लडकी निरुत्तर रही।</DIV> <DIV>मैने आखिर उससे कहा कि अच्छा चलते हैं।</DIV> <DIV>और मैं घर आगया अच्छी अच्छी यादें लिये।</DIV> <DIV><FONT face=Arial size=2></FONT>&nbsp;</DIV><div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1147000848499023972006-05-07T16:50:00.000+05:302006-05-08T05:44:50.703+05:30खतरनाक बुढ्ढा (बुढ्ढों से सावधान) Harmful Oldmanदोस्तों यदी किसी ने इससे पुर्व के पोस्ट पढे हों तो उन्हे याद ही होगा किस प्रकार मेरी <a onclick="return top.js.OpenExtLink(window,event,this)" href="http://myrajasthan.blogspot.com/2006/04/blog-post_27.html" target="_blank"><span style="color:#000000;">कोटा से रोहतक की यात्रा</span> </a>रही तथा किस प्रकार वहां पर बारात में मेरे साथ वो <a onclick="return top.js.OpenExtLink(window,event,this)" href="http://myrajasthan.blogspot.com/2006/04/my-journey.html" target="_blank"><span style="color:#000000;">अजीबोगरीब घटना</span> </a>घटी।<br /><span style="font-size:130%;">अब आगे का हाल</span><br /><span style="font-size:85%;">जैसा कि टाईटल से लग रहा है इसमें किसी बुढ्ढे का जिक्र होगा। सच में ये एक बुढ्ढे की ही दास्तान है।</span><br /><span style="font-size:85%;">कोटा जाने के लिये हमने दोबारा उसी जनशताब्दी एक्सप्रेस को चुना। जाते समय हम चार मित्र थे। गाडी हजरतनिजामुद्दिन से कोटा के लिये रवाना हुई। जिसने भी इस गाडी में सफर किया हो उसे याद होगा कि इस गाडी में बैठने की व्यवस्था बस की भांति होती है। यानी तीन सीटें इधर और तीन उधर। हम चारों में से तीनों तो साथ बैठ गये और एक पास वाली पर बैठ गया। हमारे पास सोनी का केमकोर्डर था। </span><br /><span style="font-size:85%;">हमारे आगे वाली सीट पर दो बुजुर्ग महिलाएं तथा उनके साथ एक बुजुर्ग व्यक्ति था। उनकी बातों से हमें पता चला कि दोनो महिलाओं में से एक तो उस आदमी की पत्नी थी तथा एक बहन।</span><br /><span style="font-size:130%;">यही था वो खतरनाक बुढ्ढा</span><br /><span style="font-size:85%;">इस व्यक्ति की आयु 65 के आसपास होगी। मगर इसका दिल जवान था इसका सबूत उसने थोडी देर बाद दिया। जैसे ही ट्रेन ने अपनी गती पकडी बुढ्ढे ने अपनी सीट छोड दी तथा बाजु वाली दुसरी सीट पर बैठ गया।</span><br /><span style="font-size:85%;">उसके आगे वाली सीट पर एक लडकी बैठी हूई थी जो रिलायंस के मोबाईल से खेल रही थी। हमारा एक मित्र बडी आरजू से उसको निहार रहा था पर वो थी कि पलटने का नाम ही नहीं ले रहीं थी।</span><br /><span style="font-size:85%;">मेरा दोस्त कमेंट कर रहा था कि रिलायंस तो बैकार नेटवर्क है हमारे पास तो एअरटेल है।</span><br /><span style="font-size:85%;">तभी एक अजीब घटना घटित हूई।</span><br /><span style="font-size:85%;">हम सब ने नोट किया।</span><br /><span style="font-size:85%;">हम क्या देखते हैं कि बुढ्ढे ने आगे वाली सीट की पुश्त पर सिर टिका लिया ओर सोने लगा था मगर उसका हाथ सीट की पुश्त के भी आगे जा रहा था।</span><br /><span style="font-size:85%;">लडकी के शरीर से मात्र कुछ ही दूरी पर था उसका हाथ।</span><br /><span style="font-size:85%;">हमने एक दुसरे की और देखा फिर सोचा कि ऐसे ही चला गया होगा बुढ्ढे का हाथ। नींद में होगा।</span><br /><span style="font-size:85%;">तभी हमने एक हरकत और देखी हमने देखा कि बुढ्ढे ने अपना हाथ एक इंच और आगे बडा दिया था और उसकी उंगलियां लडकी की पीठ को छूने लगी थी।</span><br /><span style="font-size:85%;">हमारा दिमाग खराब हो गया।</span><br /><span style="font-size:85%;">हमें बुढ्ढे पे गुस्सा आने लगा। गुस्सा आने का कारण नहीं बताउंगा बस गुस्सा आने लगा।</span><br /><span style="font-size:85%;">बुढ्ढे ने धीरे धीरे करके अपनी सारी उंगलिंया लडकी के सटा दी, और उन उंगलियों को गडाने लगा। हमने सोचा कि इस लडकी को पता नहीं चल रहा है क्या इसकी हरकतों का।</span><br /><span style="font-size:85%;">तभी मेरे दोस्त ने कमेंट पास किया कि "यदी कोई रिलायंस पे मिस्डकाल मार रहा हो तो बेहीचक एअरटेल को समस्या बताई जा सकती है एअर टेल समस्या का निदान करेगी।<span style="font-size:85%;">"</span></span><br /><span style="font-size:85%;">मगर लडकी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। हमने फिर कमेंट किया <span style="font-size:85%;">"लगता है लडकी को ही मजा आरहा है<span style="font-size:85%;">"</span></span></span><br /><span style="font-size:85%;">वास्तव में हम चाहते थे कि वो लडकी हमसे कहे और हम बुढ्ढे को सबक सिखा दें परन्तु जब तक लडकी नहीं कहती अपन कायको चलता सेंटर में लें।</span><br /><span style="font-size:85%;">बुढ्ढा सारी बातों से बेखबर अपना काम किये जारहा था। मैने भी सोचा कि उंगलिया अडाके ही खुश हो रहा है साला।</span><br /><span style="font-size:85%;">एक बुजुर्ग तो वो होता है कि जिसके सफेद बाल देखते ही हम उसकी ईज्जत करते हैं और एक ये साहब थे जिन पर हमें क्रोध आरहा था।</span><br /><span style="font-size:85%;">तभी हमने देखा कि बुढ्ढे की उंगलियों से परेशान होकर लडकी दायीं ओर सरक गयी थी, बुढ्ढे को पता नहीं चला वो हवा में ही अपनी उंगलियां चलाता रहा। तभी बुढ्ढे ने अपनी आंखे खोली और अपनी सीट से खडा होगया तथा हमें घूरने लगा। उसने जेब में हाथ डाला और प्लास्टिक की छोटी सी शीशी निकाली, हाथ में उडेली तो उसमें से छोटी छोटी गोलियां निकली। तीन चार गोलियां उसने मुंह के हवाले करदी। और उसके बाद साहब बाथरुम को रवाना होगये। </span><br /><span style="font-size:85%;">करीब दस मिनट के बाद वापस आये और मोर्चा संभाल लिया। </span><br /><span style="font-size:85%;">बुढ्ढे ने देखा कि लडकी दायीं ओर खिसक गई है तो उसने अपना हाथ दो सीट के बीच वाली जगह पर फंसा दिया और फिर से लडकी को छूने लगा।</span><br /><span style="font-size:85%;">हमने सोचा कि इस बार तो बुढ्ढा पिटा, अभी लडकी चिल्लाएगी ओर फिर बुढ्ढे का क्या होगा भगवान ही मालिक है।</span><br /><span style="font-size:85%;">लेकिन आश्चर्य लडकी ने कुछ भी नहीं कहा। हमने चाय बेचने वाले की तरह आवाज लगाई कि <strong>क्या किसी को मदद चाहिये। </strong>परन्तु लडकी ने कोई मदद नहीं मांगी। बेचारी लडकी फिर से बांयी ओर खिसक गई तो बुढ्ढा फिर से बांयी ओर से हाथ चलाने लगा। मैने सोचा कि लडकी शायद घबरा रही है। आखिर कार लडकी आगे की ओर झुककर बैठ गई। अब फिर से बुढ्ढे का हाथ हवा में था। उसकी उंगलिया लडकी के शरीर को खोज रही थी, और हम उसकी उंगलियों की हरकतों को देखकर क्रोध में उबल रहै थे। </span><br /><span style="font-size:85%;">बुढ्ढा परेशान हो गया क्योंकी लडकी आगे झुककर बैठ गई थी। बुढ्ढा व्यग्र हो रहा था। कि तभी वेटर आया लडकी ने खाने के लिये कुछ खरीदा और भूलवश फिर से पीछे टिककर बेठ गई। बुढ्ढे की फिर से चारों उंगलिया घी में और सर कढाई में होगया। यानी बुढ्ढा फिर से शुरु होगया। </span><br /><span style="font-size:85%;">अब हम केमरे से उसके हाथ की फिल्म उतारने लगे।</span><br /><span style="font-size:85%;">लडकी फिर से परेशान होने लगी, हमसे मदद भी नहीं ले रही थी। वो कभी दायें होती कभी बायें और बुढ्ढे मिंया भी। गजब का नींद का नाटक कर रहा था बुढ्ढा।</span><br /><span style="font-size:85%;">जैसे ही कोई रेल्वे स्टेशन आता उठ जाता और गाडी रवाना होते ही झट से सोजाता ओर फिर काम चालु।</span><br /><span style="font-size:85%;">आखिरकार</span><br /><span style="font-size:85%;">लडकी ने पास बैठे लडके से कुछ कहा।</span><br /><span style="font-size:85%;">हमने सोचा कि अब तो बुढ्ढा गया,</span><br /><span style="font-size:85%;">लेकिन हुआ कुछ और ही था। लडका अपनी सीट से खडा हूआ ओर लडकी भी तथा दोनो ने आपस में सीटें बदल ली।</span><br /><span style="font-size:85%;">मजे वाली बात ये थी कि बुढ्ढे को इस बात का पता नहीं चला। बुढ्ढा अपना हाथ चलाता रहा। अब बुढ्ढे को क्या पता कि लडकी उस जगह लडके को बैठा गई है।</span><br /><span style="font-size:85%;">आगे का पुर्वानुमान लगालगा कर हम लोटपोट हुए जा रहै थे। हम सोच सोच कर कहकहे लगा रहे थे कि अब बुढ्ढा अनजाने में लडके के उंगला करेगा।</span><br /><span style="font-size:85%;">कसम से हंस हंस के मेरा तो बुरा हाल हो गया। मेरा एक दोस्त पेट पकड पक़ड के हंस रहा था।</span><br /><span style="font-size:85%;">तभी मैने हंसते हूए कहा कि चुप रहो चुप रहो देखो कैसा मजा आता है।</span><br /><span style="font-size:85%;"><strong>बैचारा लडका</strong></span><br /><span style="font-size:85%;">उसे क्या पता था कि लडकी उसे कहां बैठा गई है।</span><br /><span style="font-size:85%;">तभी बुढ्ढे ने अपनी उंगलीयां आगे बडाई हम अपनी हंसी रोकने के लिये जबडा भींच कर बैठ गये। बुढ्ढे ने उंगलियां और आगे बडाई ओर एक उंगली अडा दी।</span><br /><span style="font-size:85%;">लडके ने गोर नहीं किया। वो और पीछे सट कर बैठ गया।</span><br /><span style="font-size:85%;">बुढ्ढे ने अपनी उंगलिया और गडाई। तभी लडके ने पलट कर देखा। उसने बुढ्ढे का हाथ देखा, फिर हमें देखा कि हम किस प्रकार हंसी को दबा रहै थे। बुढ्ढे ने नींद का नाटक करते हुए और जोर से उंगलिया गडाई लडके ने उसके हाथ को फिर से देखा फिर हमें देखा। बेचारे को काटो तो खुन नहीं, समझ गया कि लडकी के साथ क्या हो रहा होगा। </span><br /><br /><br /><strong>शेष फिर...........</strong><div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1146228321870424772006-04-28T18:15:00.000+05:302006-04-28T18:21:42.396+05:30वो रहस्यमयी कोन था ??? (My Journey)<a href="http://myrajasthan.blogspot.com/2006/04/blog-post_27.html"><span style="color:#000099;"><strong>कोटा से दिल्ली ट्रेन यात्रा</strong></span></a> तथा दिल्ली के बाद रोहतक और वहां पर शादी।<br />कसम से मजा आगया हरियाणा में भी शादी का, वैसे यहां उतने कार्यक्रम नहीं होते हैं जितने कि हमारे राजस्थान में होते हैं परन्तु हरियाणा की बात ही कुछ और है। रोहतक के पास एक गांव है <strong><em>कबूलपुर</em></strong> बस वहीं से रवाना होनी थी बारात।<br />अब बारात रवाना हूई तो <strong><em>समाचना</em></strong> पहूंची। यहां हम खूब नाचे। एक बात मैने नोट की वो ये थी कि यहां पर वर वधू के फेरों की रस्म दिन में ही हो जाती है जबकी राजस्थान में तो ये मध्यरात्री का कार्यक्रम है।<br />खेर शाम को मेरे एक मित्र <strong>संजीव</strong> ने कहा कि उसे शोच जाना है। वो भी कोटा से ही वहां पर गया था। मैने उससे कहा कि चल भई मैं भी फ्रेश हो लूंगा। अब गांव में तो शोच खुले आकाश के नीचे ही जाना पडता है। हम तीनो यानी की मैं, मुकेश तथा संजीव तीनों उचित स्थान की तलाश करने लगे।<br />हमने एक बुजुर्ग ग्रामीण से पुछा कि "कहां जाएं?"<br />तो उस बुजुर्ग ने हमें एक तालाब की तरफ का रास्ता बताया। ये जगह गांव से जरा बाहर थी। हमने कहा चलते है।<br /><strong>धूल का गुबार</strong><br />मैने कहा "यार ये हवा में इतनी धूल क्यों हो रही है?"<br />हम चक्कर में पड गये कि ये इतनी धूल कैसे हो रही थी क्योंकि उस समय हवा एकदम शान्त थी। खेर हम इसी रास्ते पर आगे बडते गये। थोडा और चले तो देखा कि वहां पर गायों का रैला लगा हूआ था। कम से कम तीन चार हजार गायें थी वहां, और सारी धूल में मस्ती कर रहीं थी, अब मुझे हवा में इतनी धूल होने का कारण तो समझ में आगया था लेकिन इतनी सारी गायें एक साथ देखकर चकरा गया था। मैने जिन्दगी में इतनी गायें एक साथ नहीं देखी थी।<br />संजीव ने लाल रंग की शर्ट पहन रखी थी और अभी उजाला भी फैला हूआथा इसलिये मैने उससे शर्ट उतारने को कहा क्योंकि हो सकता है इन गायों में कोई सांड भी हो।<br />हम वहां से आगे बडे तो हमें एक मंदिर नजर आया। काफी विशाल मंदिर था। एक गांव वाला सामने से आरहा था मैने उससे पूछा कि ये किसका मंदिर है तो उसने बताया की हनुमान जी का है।<br /><strong>बदंरो का मेला</strong><br />जिस तरह हमने गायें ही गायें देखी थी, अब हमें बंदर ही बंदर नजर आ रहै थे। असंख्य बंदर थे वहां, मुझे लग रहा थे कि जैसे मैं <strong>एलिस इन वंडरलेंड</strong> में हूँ। उन बंदरो से बचते हुए हम और आगे बडे तो मंदिर तक पहुंच गये। वहां पर एक विशाल तालाब था। लेकिन मैने सोचा कि हम यहां मदिंर के पास शोच नहीं कर सकते। मैने किसी से पुछा कि शोच के लिये कहां जाए? उस आदमी ने एक तरफ जाने को कहा उस तरफ वृक्षों कि बाड सी आ रही थी। उस आदमी ने बताया कि इन पेडों के बीच में एक पगडंडी जा रही है। तथा इस पगडंडी के जरीये इन पेडों की श्रंखला पार करने के बाद एक और तालाब आएगा, आप वहीं शोच कर लिजिएगा।<br />हमने जब इस वृक्ष श्रंखला को देखा तो लगता ही नहीं था कि इसके पार कोई तालाब होगा, ऐसा लगता था मानो मीलों लम्बा जंगल होगा।<br />संजीव का प्रेशर बढने लगा था। हमने पेडों में पगडंडी देखी और चल पडे। ऐसा लग रहा था जैसे किसी गुफा में चल रहै हों। तभी हम क्या देखते हैं कि सामने से एक नाटा सा तथा मोटा सा आदमी मस्त चाल से हमारी दिशा में आ रहा था। वो आदमी करीब साडे तीन फीट का होगा और मोटाई में अमजद खान की तरह था। उसके पीछे बाडीगार्ड की तरह दो आदमी चल रहे थे। जैसे ही वे हमारे नजदीक आये हम जरा साईड में हट गये। वे हमें देखे बिना चले गये। उन्होने हम पर जरा भी ध्यान नहीं दिया। मुझे ये बात बडी अटपटी सी लगी।<br />खैर हम जरा सा आगे बडे तो देखा कि सामने खुला मैदान था। वृक्षों की श्रंखला समाप्त हो गई थी। लम्बा चौडा मैदान और उस पर लगी हरी हरी घास अत्यंत सुंदर लग रही थी।<br />लेकिन एक बात थी।<br />वो बात ये थी कि वहां पर तालाब नहीं था। हमने चारों तरफ नजरें दोडाई लेकिन कोई तालाब नजर नही आया। पानी के नाम पर छोटे छोटे पोखर बने हुए थे। हमने फेसला किया कि इन पोखरों के पानी का ही इस्तेमान कर लेंगे।<br />हम तीनों ने अपनी अपनी पोजीशन संभाल ली।<br />उस वक्त मैने एक आदमी को देखा, यही वो रहस्यमयी आदमी था जिसका कि टाइटल में जिक्र हुआ है, मैने देखा कि उस आदमी ने एकदम सफेद रंग का कुर्ता पायजामा पहन रखा था। और वो आलथी पालथी मार कर बैठा हुआ था जहां वो बेठा हुआ था वहां पर कीचड था।<br />मैने अपने दोस्तों को उसे दिखाया, उन्होने भी उसे देखा। उस आदमी की पीठ हमारी तरफ थी, और वो एकदम योगमुद्रा में बेठा हूआ था। हमने फैसला किया कि निवृत होने के बाद उस आदमी के पास चलेंगे।<br />वह आदमी हम से करीब दो ढाई सौ फीट की दूरी पर बैठा था।<br />हम अपने कार्य से फारिंम हुए और पोखर के पानी से काम चलाया।<br />तभी मैने एक और चीज पर गौर किया, मैने संजीव से कहा "यार! तुझे नहीं लगता कि इस आदमी के हाथ आवश्यकता से अधिक लम्बे हैं।"3<br />तो उसने मजाक में हंसते हुए जवाब दिया "हां हमें पास जाकर देखना चाहिये कि कहीं उसके पैर भी तो उल्टे नहीं है"<br />इस बात पर हम सभी ने जोर से ठहाका लगाया।<br />फिर हम उस व्यक्ति कि लम्बाई का अनुमान लगाने लगे तो हमें लगा कि इस बात पर हमारा ध्यान पहले क्यो नहीं गया।<br />वो आदमी हमसे दूर जरूर था लेकिन यकीनन बैठे हुए में उसकी लम्बाई 6 फीट लग रही थी, हमने सोचा कि ये खडा होगा तो कितना लम्बा होगा।<br />हम लोग चिल्ला चिल्ला कर बातें कर रहै थे लेकिन कमाल की बात थी कि वो आदमी टस से मस नहीं हो रहा था। हम उसके काफी करीब जा चुके थे और उस आदमी ने एक बार भी पलट कर नहीं देखा था।<br />फिर न जाने हमें एकदम से क्या हुआ हम वापस जाने की बातें करने लगे एकदम उस आदमी के पीछे खडे होकर, और हमने वापस आने का रास्ता पकड लिया क्योंकि अंधेरा सा होने लगा था।<br />और हम धीरे धिरे वहां आगये जहां बारात ठहराई गई थी।<br />जब ये बात हमने वहां के रहने वाले लोगों को बताई तो किसी ने विश्वास ही नहीं किया, सब कह रहे थे कि उस तरफ वैसे तो कोई जाता नहीं और अगर चला भी गया तो कोई आलथी पालथी मारकर नहीं बेठेगा। और हां उसकी लम्बाई के और हाथों की लम्बाई के बारें में भी किसी ने विश्वास नहीं किया।<br />और जिसने विश्वास किया उसने यही कहा कि आपकी किस्मत अच्छी थी जो आप वहां से बच कर आगये।<div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1146093687827378772006-04-27T04:51:00.000+05:302006-04-27T04:51:28.040+05:30मेरी यात्रा (ऐसा देश हे मेरा)<div>बहुत दिनों बाद लिख रहा हूं थोडी गलती हो सकती है।</div> <div>मेरे करीबी मित्र कि शादी में शामिल होने कि लिये मैं 15 अप्रेल को <strong><font style="BACKGROUND-COLOR: #ffcc33" color="#33ff33">कोटा</font></strong> से <font style="BACKGROUND-COLOR: #33ff33" color="#ffcc66"><strong> दिल्ली </strong></font>चला। दिल्ली इसलिये क्योंकि रोहतक जाने के लिये दिल्ली का चक्कर लग जाता है।</div> <div>ट्रेन थी जनशताब्दी एक्सप्रेस।</div> <div>काफी सुना था इसके बारे में, आज मैं इसमें सफर करने जा रहा था। कम किराया, तीव्र गती तथा अच्छी सुविधाएं।&nbsp;तडके&nbsp;स्टेशन पहूंच गया। मेरे साथ मेरा मित्र मुकेश मालव भी था।</div> <div>सुबह के 6:30 बजे गाडी रवाना हुई।</div> <div>बार बार वेटर आने लगे। कोई पानी बेच रहा था कोई नाश्ते में कटलेट कोई चाय काफी। थोडी देर बाद टीटी साब ने डब्बे में प्रवेश किया। सबके टिकिट चेक करने लगे। ये साधारण सी बात मैं इसलिये लिख रहा हूं क्योंकि एक कहानी टीटी साब के कारण ही बनी। </div> <div>हमारी भी टिकिट कि जांच हूई। टीटीसाब आगे चले। ओर उन्होने सारे डब्बे कि जांच करली। फिर एक स्टेशन आया फिर दुसरा स्टेशन आया। मेरे जैसे लोग जो बहुत कम सफर करते हैं( हालांकि मुझे घूमना अत्यधिक पसंद हे) एसे समय में अपने अपने मोबाइल में टावर या सिग्नल खोजते रहते हैं। </div> <div>भरतपुर के बाद डब्बे में एक ओर टीटी साब चढे, वो भी टिकिट चेक करने लगे, मुझे टीटी कि शक्ल देखकर उब आरही थी। मैने अपनी आंखे बन्द करली और सोने कि कोशिश करने लगा। तभी मुझे कुछ शोर शराबे कि आवाज आई। आंखें खोलकर देखा तो पाया कि टीटी साब एक महिला से झगड रहे थे जो मेरे पीछे वाली सीट पर बैठी थी। </div> <div>कुछ देर तक झगडे पर ध्यान देने पर पता चला कि उस महिला ने अपने 6 साल के बच्चे का टिकिट नही लिया था तथा इसका कारण वह अनभिज्ञता बता रही थी।</div> <div>महिला बोली &quot;इसे तो मैं शुरु से ही गोद में बैठा कर ला रही हूं ओर फिर यह सिर्फ 6 साल का ही तो है&quot;</div> <div>टीटी साब फरमाए &quot;तीन साल से बडे का टिकिट लगता है, मालूम नहीं था क्या?&quot;</div> <div>महिला बोली &quot;जी मुझे वाकई मालूम नहीं था। और फिर मैं इसे गोद मैं भी तो बैठा कर ला रहीं हूं&quot;</div> <div>टीटी बोले &quot;अच्छा! खूब जानता हूं तेरे जैसे औरतों को, बच्चे का छोटे होने का बहाना करके इसे फोकट में ले जाती है,&nbsp;20 साल की नौकरी हे मेरी, एक काम कर इस बच्चे को क्या इन बडे बडे लोडों को बैठा ले अपनी गोद में ओर लेजा फोकट में। चल चुपचाप से जुर्माने को 334 रूपये निकाल वरना अगले स्टेशन पर ही थाने में करवाउंगा तुझे।&quot; </div> <div>मैं उस टीटी कि वाणी सुन कर हक्का बक्का रह गया। एक सभ्रांत महिला से अत्यधिक बदतमीजी से बात कर रहा था वो। मेरा मन किया कि खडा होकर एक तमाचा जड दूं टीटी के गाल पे।</div> <div>पुलिस की धमकी सुनते ही महिला गिडगिडाने लगी ओर अपने पर्स में रुपयों कि खोजबीन करने लगी। उसने 50 का नोट निकाला और बोली कि साब मेरे पास तो सिर्फ ये ही हैं इस वक्त।</div> <div>टीटी उसे धमकी देकर आगे चला गया।</div> <div>मैने सोचा कि टीटी भला बुरा कहकर शांत होगया। और एक मोका देकर चला गया होगा मगर मेरा सोचना गलत था टीटी साब ने दुबारा प्रवेश किया और इस बार उनके साथ एक पुलिस वाला भी था।</div> <div>&quot;यही है वो अगले स्टेशन पर उतार लेना इसे&quot; टीटी&nbsp;पुलिस वाले से&nbsp;बोला</div> <div>मुझे लगा कि अब इस महिला कि दुर्गति होने वाली है।</div> <div>वो एक ठीक ठाक पढी लिखी औरत थी।</div> <div>मुझे लगा कि अब अगर मैं नहीं बोला तो धिक्कार हे मुझपे।</div> <div>और मैं बीच में कूद पडा</div> <div>मैने टीटी से कहा &quot;टीटी साब गलती होगई इनसे आप कृपया इन्हे माफ करदें। एक बार तो सभी माफ करते हैं।&quot;</div> <div>टीटी बोला &quot;20 साल की नौकरी है मेरी और आप जैसे हजारों देखें है। कानून तो कानून है।&quot;</div> <div>मैनें कहा &quot;एक बार माफ कर दीजिय़े, आपके कानून का क्या बिगड जाएगा?&quot;</div> <div>मेरे बोलने की देर थी कि डिब्बे में कई लोग एक साथ मेरे सुर में सुर मिलाने लगे, सारे के सारे भरे बैठे थे और किसी के बोलने का इन्तजार कर रहै थे।</div> <div>कोई बोला &quot;क्या कानून की बाते करते हो? तुम भी तो रुपये खाकर लोगो को रिजर्वेशन में बेठाते हो।&quot;</div> <div>टीटी गुस्से में आगया, उसने जलती हुई आंखों से मेरी तरफ देखा। मेरे मन में ख्याल आया कि कहीं मैनें <strong>चलता सेंटर में तो नहीं ले लिया</strong>(फटे में टांग अडाना)&nbsp;है।</div> <div>टीटी भुनभनाने लगा। मैने उसकी नाराजगी दूर करने के लिया उससे कहा &quot;भाईसाब माफ करदो बेचारी को, आप तो बडे हो। इस बार छोड दो इसे।&quot;</div> <div>सब लोग टीटी को गुस्से में देख रहे थे।</div> <div>अन्त में मैने कहा &quot;टीटी साब आप कोटा ही रहते हो ना!&quot;</div> <div>&quot;हां&quot;</div> <div>&quot;बस तो फिर क्या है वहां मिल लुंगा मैं आपसे, ओर चुका दुंगा इसका जुर्माना&quot;</div> <div>टीटी साब को फिर पता नहीं क्या हुआ। उन्होने गुस्से में मुझे देखा, और डिब्बे से प्रस्थान कर गये।</div> <div>मैने महिला की तरफ देखा। वो बडी कृतज्ञता से मेरी तरफ देख रही थी। मैने तो सिर्फ इतना कहा।</div> <div>&quot;अगली बार ध्यान रखना, बच्चे का टिकिट जरूर लेना&quot;</div> <div>&nbsp;</div> <div>&nbsp;</div><div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1145496885912015052006-04-20T07:04:00.000+05:302006-04-20T07:04:45.966+05:30लो मैं आ गया<div>मित्र की शादी से आने के बाद काफी अच्छा महसूस कर रहा हूँ। मगर कुछ भी हो मजा आ गया। मेरे जाने से लेकर आने तक ऐसे ऐसे वाकये( घटनाएं) हुई कि मेरा सफर अत्यंत मनोरंजक बन गया। </div> <div>मेरे सफर की कहानी हंसी मजाक, रहस्य रोमांच से भरपूर है। कहानी काफी लम्बी है इसलिये मैं इसे अगली बार सुनाउंगा।</div><div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1145011996754364002006-04-14T16:23:00.000+05:302006-04-14T16:23:17.203+05:30मित्र की शादी में जा रहा हूँअब तो यारों चार दिन बाद मुलाकात होगी। ब्लागिंग से जुडने के बाद पहली बार इतने दिन इससे दूर रहूंगा।<div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1144925182269019102006-04-13T16:16:00.000+05:302006-04-13T16:16:25.723+05:30सलमान खान छूट गया<div>आज जब सलमान छूटा तो ऐसे अकडकर निकला कि विश्वविजय कर ली हो। बाकी सारे कलाकार जो उसे लेने गये थे(जो दाउद की पार्टी में ठुमके लगाते थे) वे भी अत्यंत प्रसन्न नजर आ रहे थे। जेल के बाहर सलमान के प्रशंषक नारे लगा रहे थे कि <strong> अभी तो ली अंगडाई है, आगे और लडाई है</strong>।</div> <div>पर क्या ये आजादी परमानेंट(स्थाई) है?</div> <div>जरा सोचो सलमान क्या पता जिस दरवाजे से तुम अकडकर निकल रहे हो वहां फिर से तुम्हारे स्वागत की तैयारीयां हो रही हो?</div> <div>&nbsp;</div><div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1144780880522278492006-04-12T00:11:00.000+05:302006-04-12T00:11:20.706+05:30ब्लाग लिखने वाले को दस साल की सजा<div>घबराइये नहीं भारत में नहीं चीन में।</div> <div>जी हां यह सत्य है, चीन में शानदोंग प्रान्त में एक शिक्षक को लोकतंत्र के विषय में लेख प्रकाशित करने के आरोप में दस साल की सजा सुनाई गई है। उसका जुर्म यह है कि उसने अपने लेख में सरकार विरोधी विचार व्यक्त किये। चुंकि इस घटना का ताल्लुक सुचना के प्रसार की एक व्यवस्था इंटरनेट से है,&nbsp; जिसे आजाद अभिव्यक्ति का सबसे प्रमुख औजार माना जाता है और जिसे अनुशाषित करने कि प्राय: कोई कोशिश नहीं होती,&nbsp; इसलिये मैं इससे बडा चकित हूँ। </div> <div>चीन में एक पत्रकार भी ऐसे ही जुर्म में जेल कि हवा खा रहा है। हाल ही में चीन में इंटरनेट को नियंत्रित करने की जितनी भी कोशिशे कि गई है उन सबसे मेरे मन में सवाल उभर रहै हैं। कई इंटरनेट कंपनियां अपने व्यापार के मद्देनजर चीन सरकार के आगे घुटने टेक रहीं है। </div> <div>हालांकी इंटरनेट पर पचास फीसदी सामग्री अश्लीलता संबंधी है और आतंकवादी गतिविधियों में भी 11 सितंबर के बाद इंटरनेट का इस्तेमाल बडा है। लेकिन इससे किसी को भी इनकार नहीं होगा कि सूचना तकनीक के विश्वव्यापी प्रवाह में जो भुमिका इंटरनेट निभा रहा है, शायद ही कोई दुसरा औजार या तकनीक कर सके। अगर इंटरनेट को सीमित दायरे में कैद किया जाए तो सुचना साम्राज्य अपना वास्तविक औचित्य ही खो देगा, क्योंकि सूचना निरंकुश सत्ताओं की मनमानी की शिकार होने के स्थान पर बंधनो से मुक्त होकर स्वस्थ समाज के निर्माण में सहयोग देती है। </div> <div>गूगल को भी चीन में सेल्फ सेंसर्ड वेबसाईट खोलनी पडी है। चीन में सरकारी स्तर पर खुलापन और उदार रवैया संभव नहीं है, जैसा कि भारत में विदेशी कंपनीयों को हासिल है। यहां तो गूगल अर्थ डाट कोम पर राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री निवास और महत्वपूर्ण ठिकाने देखे जा सकते है। पर चीन में ऐसा नहीं है वहां इंटरनेट पुलिस है जो विदेशी वेबसाइटों पर निगरानी रखती है। </div> <div>इस संभावित प्रतिबंध और बाजार के खोने के डर ने ही गूगल को चीन के लिये अलग से नई वेबसाइट(गूगल डॉट सीएन) बनाने पर मजबूर कर दिया, जिस पर चीनी भाषा में कुछ चुनिंदा सामग्री तथा बेहद सीमित वेब एक्सेस मिल पाएगा।</div> <div>शायद&nbsp;गूगल का मानना है कि चीनी समाज और बाजार से हमेशा के लिये बाहर हो जाने से अच्छा विकल्प यही है।<br clear="all"><br>-- <br>युगल मेहरा </div><div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1144663665863981962006-04-10T15:25:00.000+05:302006-04-10T15:37:46.026+05:30श्रीगंगानगर में महिला 'डॉन'<p>दैनिक भास्कर के अनुसार श्रीगंगानगर में तीन महिला 'डॉन' है। इन महिलाओं ने अपराध जगत में सनसनी फैला रखी है। इन पर करीब 55-56 अपराधिक मामले दर्ज हैं।(दैनिक भास्कर)</p><p>इनमें सबसे खतरनाक महिला 'डॉन'है 57 वर्षीय भागो देवी। इसने हत्या, चोरी, मारपीट के 32 मामले दर्ज हैं। इसे 1994 में पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर घोषित कर दिया था तथा 2000 में रासुका अर्थात राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत गिरफ्तार भी कर चुकी है। इसके दो पुत्र भी हिस्ट्रीशीटर हैं।शहर के अन्य पुरुष 'डॉन' भागो देवी के सामने फटकते भी नहीं है।</p><p>दुसरी लच्छो है</p><p>तीसरी है निर्मला मेडम।</p><p>ऐसा लगता है कि जैसे मैं किसी फिल्म की कहानी लिख रहा हो।</p><p>आपको कैसा लगा पढकर?</p><div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1144435756636630372006-04-08T00:12:00.000+05:302006-04-08T00:19:16.650+05:30निरंतर ब्लागजीन के बारे मेंये जो निरंतर ब्लागजीन है यह अब बंद हो गई है क्या?<br />अगस्त 2005 के बाद कोई अंक ही नहीं आया इसका।<br />क्या कारण हो सकता है इसका?<br />हम इसलिये पूछ रहै हैं भाई क्योंकि ये हमें अच्छी लगी है।<br />जल्दी शुरू करो भाई।<div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1144240974297581862006-04-05T18:08:00.000+05:302006-04-05T18:30:22.230+05:30उम्र कैसे साबित करुंयार कोई बन्दा आपसे कहे की आप बुडउ हैं जब कि आप 26साल के नोजवान बन्दे है, तो मैं क्या करुं। बताओ यारों। आप चाहै तो मेरे फोटो देख सकते हैं <a href="http://photos1.blogger.com/hello/89/10137/640/scan.jpg">यहां पर</a><div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1144170450541376602006-04-04T22:35:00.000+05:302006-04-04T22:37:30.566+05:30धर्म की परिभाषा देनी ही पडेगीधर्म जीवन एक विधी है जो व्यक्ति को उसके वास्तविक कर्तव्यों का बोध कराती है। धर्म का शाब्दिक अर्थ है धारण करना। अर्थात जो तत्व सम्पूर्ण संसार के जीवन को धारण करता हो, जिसके बिना संसार में व्यक्ति की स्थिती संभव न हो वही धर्म है।<br />यानी कि जिन सिद्धान्तों के अनुसार हम अपना दैनिक जीवन व्यतीत करते हैं तथा जिनके द्वारा हमारे सामाजिक सम्बंधों की स्थापना होती है, वही धर्म है।<br />जो बुद्धिजीवी यह कर धर्म को नकारते हैं कि हमने इतने ग्रंथ पढ लिये है और धर्म बैकार की बकवास है। जो यह कहते हैं की बिना धर्म के भी वे जीवन यापन कर सकते हैं, मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि धर्म एक तत्व है वह हिन्दु, मुस्लिम, सिख और ईसाई नहीं है। धर्म जीवन को सम्पूर्णता प्रदान करने की विधी है। धर्मानुसार हमें विभिन्न कार्य करने पडते हैं।<br />धर्म को आप नकार नहीं सकते क्योंकि धर्म वह है जो व्यक्ति के चरित्र और नैतिक भावनाओं को उत्तम करता है तथा व्यक्ति में कर्तव्य की भावना का विकास करता है।<br />धर्म को विस्तृत रूप में देखें। धर्म का रूप अत्यधिक विस्तृत है, यदि मैने पूरा यहां समझाने की कोशिश की तो यह एक क्लासरूम लगेगा। धर्म कर्तव्य है, आप कितने ही तथ्यों पर विश्वास करने वाले क्यों न हो कितने ही विज्ञान पर आधारित बाते समझने वाले क्यों न हो, परंतु आपको धर्मानुसार चलना ही पडता है।<br />इतनी धार्मिक बातें धर्म से सीखने के बाद आप धर्म से विरक्त चाह कर भी नहीं हो पाएगें।<br />1. क्या आप पितृ धर्म का पालन नहीं करेंगे?<br />2. क्या आप मातृ धर्म का पालन नहीं करेंगे?<br />3. क्या आप पुत्र धर्म नहीं निभाएंगे?<br />4. क्या आप पराई स्त्री पर नजर डालेंगे? (धर्म ने ही सिखाया है कि पराई नारी पर नजर न डालें)<br />5. क्या आप गुरुजनों का सम्मान नहीं करेंगे?<br />यही सब तो धर्म है।<br />बहुत कुछ और भी बाकी है,<br />लेकिन में सार में कहना चाहता हूँ कि जो तत्व कल्याण में सहायक हो, जिसके द्वारा मनुष्य सदैव अभय रहे, अधीनता और आत्म-शान्ति का अनुभव करे, जिसमें वास्तविक संतोष, वैभव और यश प्राप्त हो, उसी को धर्म कहा जाता है।<div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1143888046715592652006-04-01T15:50:00.000+05:302006-04-01T16:10:46.833+05:30मैं क्षमा चाहता हूँजी हां मैं क्षमा चाहता हूँ उन सभी महानुभावों से जो मेरे विचारों द्वारा व्यथीत हो जाते हैं।<br />मैं क्षमा चाहता हूँ उनसे जो जरा आधुनिक हैं जिन्हें होली का त्यौहार नहीं सुहाता कि इस त्यौहार मैं भौंडापन है। मैं क्षमा चाहता हूँ उनसे जिन्हे वेलेन्टाईन डे नहीं मनाने दिया जाता। मैं क्षमा चाहता हूँ उनसे जिन्हे मैं गुस्से में तु तडाक कर जाता हूँ। मैं क्षमा चाहता हूँ उनसे जो धर्म का पक्ष लेने पर मुझे हिन्दुवादी कहते है। मैं क्षमा चाहता हूँ उनसे जो अपने धर्म की बुराई करके इठलाते हैं। मैं क्षमा चाहता हूँ उनसे जो आधुनिक विचार धारा के कहलाते हैं। मैं क्षमा चाहता हूँ उनसे जो दिखावे में जिंदगी बिताते है। मैं क्षमा चाहता हूँ उनसे जो यह जताते हैं कि वे धर्मनिरपेक्ष हैं।<br /><br />मैं क्षमा चाहता हूँ उनसे जिनके लिये धर्म एक बकवास है।<br />मैं क्षमा चाहता हूँ उनसे जिन्हे मनुष्य बनने कि आस है।।<br />जो मुझे मानवता पर गन्दा धब्बा बताते हैं।<br />अपने जिस्म के दाग शान से बताते हैं।।<br />हां मेरी बुद्धि अल्प है और संकीर्ण मानसिकता है।<br />लेकिन फिर भी धार्मिक होना अच्छा लगता है।।<br />जो रामायण, महाभारत, गीता, विष्णु पुराण और शिव पुराण भी पढते हैं।<br />जो मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे और गिरजाघर की सिढीयां भी चडते हैं।।<br />और बाद में इन ग्रंथों को बुरा बताते हैं।<br />मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे और गिरजाघर जाने को पर्यटन बताते है।<br />जो पाखडिंयो के कृत्य से पुरे धर्म को गाली बकते है।<br />एसे ही लोगो को आधुनिक जगत में महान कहते है।<br />गोतम हिंदु थे जब बोधिसत्व प्राप्त हुआ था।<br />तब एक नये धर्म का आगाज हुआ था।।<br />बोद्ध धर्म को उन्होने एक उंचाई दी।<br />कोई बता दे कि उन्होने हिन्दु धर्म की बुराई की।।<br />प्रत्येक धर्म महान है क्योकि वह मानवता, मनुष्य का कल्याण सिखाता है।<br />परंतु इससे भी महान वे लोग हैं जिन्हे हर धर्म एक बकवास नजर आता है।।<br />मैं क्षमा चाहता हूँ उनसे मैं क्षमा चाहता हूँ उनसे।।।<div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1143799680346364412006-03-31T15:38:00.000+05:302006-04-01T08:22:10.336+05:30जय हो आधुनिकता की<a href='http://www.akshargram.com/sarvagya/index.php/Anugunj'><img src='http://akshargram.com/images/anugunj.jpg' border='0'alt='Akshargram Anugunj' align='right' hspace='5' vspace='5' /></a><br />आजकल के आधुनिक विचारों के नौजवान क्या सोचते हैं, सोचकर आश्चर्य होता है। अपने ही धर्म की बुराई करना तो आजकल फैशन हो गया है। आज मैने एक बुद्धिजीवी कि वेबसाईट पर एक आलेख <a href="http://itsme.wordpress.com/2006/03/30/religion-or-hypocrisy">धर्म या ढोंग</a> को पढा तो मन ही मन नारा लगाया <strong>कि जय हो आधुनिकता </strong>की<strong>। </strong><br />माना कि धर्म मे कई खामियां होती है। परंतु धर्म ही सदाचरण का कारक भी होता है।<br /><strong><span style="BACKGROUND-COLOR: #ffff99;font-size:130%;" >धर्म का अर्थ</span></strong><br /><span style="BACKGROUND-COLOR: #ffff99">क्या होता है धर्म का अर्थ, धर्म को परिभाषित करते हुए कह सकते हैं कि धर्म वह है जो हमारे आचरण को मर्यादित करता है। हमारी सीमाएं बनाता है। धर्म में मन का विश्वास जुडा होता है। धर्म मनुष्य को संस्कारशील बनाता है। </span><br /><span style="BACKGROUND-COLOR: #ffff99;font-size:130%;" ><strong>धर्म के ठेकेदार</strong></span><br /><span style="BACKGROUND-COLOR: #ffff99">पंडे पुरोहित, धर्म के नाम पर राजनिती करने वाले धर्म के ठेकेदार बनते हैं। इसका एकमात्र कारण आमजन में अज्ञानता है। इन लोगों के कार्यों के कारण हम धर्म को गलत नहीं मान सकते। क्योंकि यह कोई सर्वमान्य सत्य नहीं है कि पंडा ब्राह्मण जो कर रहा है वह धर्म कार्य कर रहा हैं। हो सकता है वह आपकी धार्मिक भावनाए भडका कर अपना उल्लू सीधा कर रहा हो। </span><span style="BACKGROUND-COLOR: #ffff99">इन लोगों के कार्यकलापों को धर्म कार्य नहीं कहा जा सकता।</span><br /><span style="BACKGROUND-COLOR: #ffff99">और यदी कोई व्यक्ति इन लोगो को ही धर्म के स्वरूप मानकर धर्म से विरक्त होता है तो वह व्यक्ति मूर्ख ही हो सकता है।</span><div class="blogger-post-footer">yugals weblinks ?????????? ???????? ???? ???</div>Yugal Mehrahttp://www.blogger.com/profile/07262836865022038577noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-23907885.post-1143378798817253712006-03-26T18:37:00.000+05:302006-03-26T18:43:18.830+05:30क्या किसी ने इसे देखा है?<a href="http://photos1.blogger.com/hello/89/10137/640/scan.1.jpg"><img style="FLOAT: left; MARGIN: 0px 10px 10px 0px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand" alt="" src="http://photos1.blogger.com/hello/89/10137/640/scan.1.jpg" border="0" /></a><br />यह ब्लेक एण्ड व्हाइट चित्र,<br />जो कि आप सभी ब्लॉगर भाई देख रहे हैं मेरे अभिन्न मित्र नितिन सोरल का है। जिसे हम सभी पिन्टु कह के बुलाते थे। अब 'थे' शब्द का प्रयोग होते ही आप सभी को अन्दाजा हो गया होगा कि आजकल पिन्टु हमारे साथ नहीं है। कहां गया ये हम नहीं जानते, इतना जानते हैं कि जहां भी गया होगा अपने यारों को भूला नहीं होगा। ये एक ही फोटो है जो मेरे पास मोजूद है, और ये फोटो तीन साल पूरानी है।<br />शहर छोड कर कहीं चला गया वो। जब तक साथ था बडा यारबाज था, अब हमें याद भी नहीं करता वो। जबकि हम सभी उसे बहुत याद करते है। जब भी उसकी याद आती है, दिल बैचेन हो जाता है। रात तक साथ था सुबह पता चला कि चला गया वो। आम बोलचाल में जिसे पक्का दोस्त कहते हैं, वही था वो।कुछ कारण रहे जिसकी वजह से उसे परिवार समेत शहर छोडक