मेरा राजस्थान My Rajasthan

कान पर हाथ रख लो चाहे मैं तो चिल्लाता रहूँगा

Monday, July 09, 2007

मै फिर आगया हूँ

काफी दिनो बाद नेट पर बैठने का मौका मिला,
नारद याद आगया।काफी कुछ बदल गया है।
अब मैं नियमित आया करुंगा।
युगल मेहरा

7 Comments:

Blogger Pankaj Bengani said...

कहाँ चले गए थे मित्र. तुम्हारे वियोग मे तो दूबला हो चला हुँ. अब यही रहो और बतियाओ :)

Tuesday, July 10, 2007 9:17:00 AM  
Blogger Sagar Chand Nahar said...

बिना बताये कहाँ चले गये थे?ना चिठ्ठी ना पत्री?
बहुत बुरी बात है। ऐसे चले जाना।
खैर अब आये हो तो अब कहीं जाना मत, आपका एक बार फिर से स्वागत करते हैं।

Tuesday, July 10, 2007 10:11:00 AM  
Blogger Raviratlami said...

अभी भी आप कोटा में ही हैं या कहीं और?

Tuesday, July 10, 2007 11:06:00 AM  
Blogger Yugal Mehra said...

पुनर्स्वागत का धन्यवाद
मैं अभी कोटा में ही हुँ
दोस्तो के कमेंट पडकर अच्छा लगा।

Tuesday, July 10, 2007 4:52:00 PM  
Blogger Yugal Mehra said...

पहले घर से काम करता था अब ऑफिस से शुरुआत है।

Tuesday, July 10, 2007 4:55:00 PM  
Blogger Udan Tashtari said...

अरे वाह!!! हम तो तरस गये भई तुहार दरस को. न तुम लिख रहे हो न हमें ऐसा मैटर मिल रहा है कि वाह वाही लुटें. अब फटाफट लिखना जारी करो. इतने दिनों मे तो खुब मसाला इक्कट्ठा हो गया होगा. अब बिना बताये मत जाना. :)

Wednesday, July 11, 2007 2:09:00 AM  
Blogger Shastri JC Philip said...

नियमित रूप से लिखा करें. सबको अच्छा लगेगा -- शास्त्री जे सी फिलिप

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है
http://www.Sarathi.info

Saturday, August 11, 2007 4:21:00 PM  

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