Sunday, March 12, 2006

रंग बरसे सूखे चुनर वाली
जी हां इस बार होली में भीगना मना है। सुनने में बुरा लगता है पर यदि हमें जल बचाना है तो हमें होली सूखी ही खेलनी पडेगी।
कमाल की बात है कि हमारे देश में हमारा ही त्यौहार हम मजे ले ले कर नहीं मना पा रहे हैं। क्या हम होली पर प्रतिदिन से कई गुना पानी व्यर्थ कर देंगे। हमारी सरकारें एवं हमारे अखबार हमें प्रेरित कर रहे हैं कि हम पानी बर्बाद न करें। परंतु यथार्थ में बिना पानी कि होली संभव तो है परंतु उसमें आपको त्यौहार का मजा, हुल्लड, मस्ती भी मिल जाये यह असंभव है।
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