मेरा राजस्थान My Rajasthan

कान पर हाथ रख लो चाहे मैं तो चिल्लाता रहूँगा

Thursday, July 02, 2009

मतलब निकल गया है तो पहचानते नही

देश की जनता ने जितना अटूट विश्वास प्रकट किया था । उसका धन्यवाद् देश की जनता को दे दिया है। हाथ आम आदमी की जेब में पहुँच गया है। और बेचारे आम आदमी की जेब पहले से ही फटी हुई है । ऊपर से गिरती महंगाई उसका मुह चिडा रही है।देश की जनता भी आपको साधुवाद देना चाहती है।
हमने आपको जर्रे से ताज बनाया और आपने क्या खूब तोहफा दिया। वाह वाह ।
आपने बता दिया की अगले पाँच साल अब आप क्या करने वाले हो ।
हम भी तैयार हैं हर जुल्म सहने के लिए।
आपने चुनाव से पहले अखबारों में विज्ञापन दिए थे की हमने पेट्रोल के दाम कम किए हैं हमें वोट दो। अब फिर सादे चार साल बाद विज्ञापन देना लेकिन रेट कम करने के बाद।
JAI HO

Friday, October 17, 2008

पेट्रोलियम मंत्री की धोखेबाजी

पेट्रोलियम मंत्री की धोखेबाजी पेट्रोलियम मंत्री ने कहा था की कच्चे तेल की कीमत ६७ डॉलर प्रति बेरल आने पर देश में पेट्रोलियम पदार्थों की दरें कम की जायेगी. अब कच्चे तेल की भारतीय बास्केट ६२ डॉलर प्रति बैरल आ गयी है परन्तु सूत्रों से पता चला है की पेट्रलियम मंत्रालय कीमतें कम नहीं करेगा. जबकि पेट्रोल की दरें जब बड़ाई गयी थी जब कच्चा तेल १४० डॉलर प्रति बैरल आगया था. अब ये वहां से दो गुने से भी ज्यादा नीचे आ गया है. कमाल है यार दादागिरी.

Monday, October 06, 2008

सेंसेक्स ने १२००० तोड़ दिया

सेंसेक्स ने १२००० तोड़ दिया।
मर गए

Monday, July 09, 2007

मै फिर आगया हूँ

काफी दिनो बाद नेट पर बैठने का मौका मिला,
नारद याद आगया।काफी कुछ बदल गया है।
अब मैं नियमित आया करुंगा।
युगल मेहरा

Tuesday, June 06, 2006

इसे खून पीना कहते है

मेरे महान देश की सरकार ने फिर से पेट्रोल डीजल के दाम बढा दिये। पूरे चार रूपये।
जिसने भी सुना भोचक्का रह गया।
मेरे एक मित्र का मानना है कि सरकार सडकों पर वाहनो का दबाव कम करने का प्रयास कर रही है।
सरकार का राग हमेशा की तरह वही पुराना है कि कच्चे तेल के दाम बढ रहै हैं। इसलिये सरकार घाटा नहीं खा सकती है और दाम बडाना मजबूरी बताती है। और फिर मेरे देश की तेल कम्पनीयां भी तो कह रही है की वे घाटे में चल रही है।
सच्चाई कोई नहीं जानता
आखिर क्या है सच्चाई, जब दुसरे मुल्कों में पेट्रोल के दाम कम है तो हमारे देश में उच्चतम स्तर पर क्यों?
इसका सिर्फ और सिर्फ एक ही कारण है कि हमारे देश की सरकारें संवेदनहीन है। दाम बढाने का जनता पर क्या असर पडता है इससे सरकार को कोई लेना देना नहीं है। लेकिन एक बात सोचने लायक है कि सरकारें जनता कमर क्यों तोड रही है?
सारा देश जानता है कि पेट्रोल डीजल के दाम बडने से कहां क्या असर होता है और कहां कितनी महंगाई बड जाती है?
आखिर सरकार की संवेदनहीनता का क्या कारण है जबकी इन लोगों को वोट मांगने हमारे बीच में ही आना पडता है?
जब भी दाम बढाए जाते हैं उसका कारण कच्चे तेल की कीमत में वृद्धी तथा सरकार को हो रहा घाटे को बता दिया जाता है, मैं ये जानना चाहता हूं कि आखिर सरकार को घाटा किस जगह पर हो रहा है। जिस मुल्य में तेल सरकार को पडता है उसी मुल्य में हमें तो नहीं बेचा जाता है बल्की बढाकर बेचा जाता है फिर सरकार को घाटा लगने का तो कोई सवाल ही नहीं खडा होता है।
सारा खेल रेवेन्यु का है
आखिर सारा खेल रेवेन्यु का है। एक लीटर पेट्रोल पर सरकार कर लगाकर द्वारा 17 से 19 रूपये तक बचाती है। जब ईंधन की कीमते एफोर्ड करना देश की जनता की जैब के दायरे से बाहर होता जा रहा है तो क्या सरकार  का इस वस्तु से रेवेन्यु कमाना कहां तक वाजिब है? कुछ कर केन्द्र सरकार लगाती है कुछ कर राज्य सरकार लगाती है।
आखिर ईंधन को रेवेन्यु के दायरे से बाहर क्यों नहीं कर दिया जाता?
मंत्री जी का क्या जाता है।
वे तो सरकारी खर्च के ईंधन पर यात्राएं करते हैं।
कम्पनीयों का झूठ
देश की कम्पनीयां हमेशा अपने आप को घाटे में बताती रहती है, मेरे समझ में ये नहीं आता की अगर ये कम्पनीयां इतनी घाटे में रहती है तो फिर डीलर को डिस्काउंट कहां से देती है?
क्या पेट्रोल कर दायरे से मुक्त हो पाएगा? शायद कभी नहीं।
सरकारों को ऐसे ही निरीह जनता का लहू पीना है और पीती रहैंगी। चाहै कोई सी भी सरकार आए खुं पीना बदस्तुर जारी रहैगा।

Saturday, June 03, 2006

क्या आत्मा अजर अमर है?

आत्मा अजर अमर होती है। शरीर नाशवान है वह मरता है परन्तु आत्मा कभी नहीं मरती है। यही हमें बचपन से ही सिखाया जाता है।
आत्माएं शरीर बदलती रहती है। आत्माओं के लिये शरीर मात्र एक किराए के मकान की तरह होता है। जब वे इसे छोडती हैं तो शरीर

को मृत मान लिया जाता है।
इसका मतलब हम आत्माए हैं जो इस शरीर में रह रहै है। किसी दिन हम इस शरीर को छोड देंगे।
लेकिन जब सभी जानते हैं कि आत्माएं नहीं मरती तो फिर किसी के मरने पर इतना रोना धोना क्यों होता है।
दुनिया की जनसंख्या क्यों बढ रही है?
यह बात भी आश्यर्य की है कि दुनिया की जनसंख्या क्यों बढ रही है जबकी आत्मा तो अजर अमर है। आत्माएं शरीर बदलती है इससे

मानव का जीवन मृत्यु का खेल चलता है, तो इस नियम के अनुसार तो जनसंख्या नहीं बढनी चाहीये न। क्योंकी जो मर रहा है वो

कुछ दिनों बाद फिर जन्म ले रहा है, तो फिर इतनी पापूलेशन कैसे बढी।
हम भारतीय 35 करोड से एक अरब कैसे होगये?
क्या नई नई आत्माएं जन्म ले रही है?
उदाहरण के तोर पर भारत देश में 1940 के समय लगभग 35करोड की जनसंख्या थी। इसका मतलब 35करोड आत्माएं 35करोड

शरीरों में रह रही थी। तो फिर ये जनसंख्या उत्तरोत्तर आगे कैसे बडती गई। तो क्या लगातार आत्माएं भी जन्म ले रही थी?
ये बात मेरी समझ से परे है
क्या आत्माएं भी आपस में शादी करके बच्चे पैदा कर रही है?
तभी तो एक अरब आत्माएं हो गई है।
इसका मतलब सरकार को आबादी नियंत्रण के ये जनता को समझाने कि बजाय आत्माएं को समझाना चाहिये कि वो आत्माएं पैदा न

करें। बैचारे शरीर फालतु ही बदनाम हो रहै हैं जनसंख्या वृद्धी के लिये।

Thursday, May 18, 2006

ऐसा भी होता है

कभी कभी एसा होता है कि मन करता है कि चिठ्ठे पर कुछ लिखा जाए और कुछ सूझता नहीं, ऐसा मेरे साथ ही नहीं सबके साथ होता होगा। हम सभी के साथ कभी न कभी ऐसा वक्त आता है जब हम लिखना चाहते हैं और यह तक नहीं सोच पाते कि विषय क्या होना चाहिये। और जब विषय ही नहीं हो तो लिखें क्या खाक। विषय ढूढंने के लिये समाचार पत्र देखतें हैं या टीवी। फिर भी विषय तलाशने में असफल होते हैं। ऐसे में क्या करे चिठ्ठाकार।
क्या लिखे वो?
आज मेरे साथ यही समस्या हुई। लिखने की इच्छा हुई और विषय नहीं ढूंढ पाया कि किस पर लिखा जाए।
तब मुझे एक आईडीया आया।
मैने सोचा कि जब कुछ नहीं आरहा तो क्यो न दुसरों के चिठ्ठे पढूं।
और जब चिठ्ठे पढे तो सोचा कि क्यों न इसी विषय पर लिख दुं कि विषय नहीं मिल रहा है।
और ठोक दी यह पोस्ट।
अब किसी को इसे पढकर मजा आये न आये, मुझे तो लिखने में बहूत मजा आया।
झेलो भई झेलो
हा हा हा

 

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